क्या कमर के निचले हिस्से में दर्द से कमर और पैर में दर्द हो सकता है?HealthPlanet

Posted on Tue 7th Feb 2023 : 10:00

Sciatica Symptoms: कमर से लेकर पैरों तक रहता है दर्द तो हो सकता है सायटिका, जानिये लक्षण और बचाव
साइटिका शरीर की सबसे बड़ी नस (Nerve) है जो रीढ़ की हड्डी से पैर तक बिछी रहती है।

साइटिका शरीर की सबसे बड़ी नस (Nerve) है जो रीढ़ की हड्डी से पैर तक बिछी रहती है। साइटिका होने पर दर्द धीरे-धीरे भी हो सकता और बहुत तेज भी हो सकता है। साइटिका एक ऐसी परेशानी है जिसमें कमर से संबंधित नसों में से किसी एक में भी सूजन आ जाती है जिसकी वजह से असहनीय दर्द कमर से लेकर पैर तक होता है।

कमर से पैर तक होने वाले इस दर्द को साइटिका कहते हैं। ये परेशानी अक्सर 50 साल से अधिक उम्र के लोगों में देखी जाती थी लेकिन खराब लाइफस्टाइल की वजह से आज कल ये परेशानी कम उम्र के युवाओं को भी परेशान कर रही है।

सायटिका (Sciatica) न्यूरोलॉजी संबंधी एक बीमारी है जिसमें सायटिका नर्वस ( sciatic nerve) में सर्दी लगने, अधिक चलने से, ज्यादा भार उठाने से, स्पाइन में परेशानी होने से दर्द होता है। इस परेशानी की वजह से दर्द कूल्हे के ज्वाइंट से शुरू होता है और धीरे-धीरे पैर के नीचे तक फैलने लगता है। अक्सर लोग इस दर्द को कमर का दर्द समझते हैं और उसके लिए घरेलू उपचार करना शुरू कर देते हैं। ये न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम है जिसके लिए एक्सरसाइज और लाइफस्टाइल में बदलाव जरूरी है।

सायटिका के लक्षण: पीठ के निचले हिस्से से पैर तक दर्द होना, इस दर्द की वजह से हिलना-डुलना मुश्किल होना, टांगो या पैरों में कमजोरी महसूस होना या सुन्न होना, सुई चुभने जैसा दर्द महसूस होना, पैर की उंगलियों या पैरों में दर्दनाक झुनझुनी होना भी शामिल है।

कहीं आप भी तो इस दर्द से परेशान नहीं है तो तुरंत ही अपनी डाइट में बदलाव करें और कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें। साइटिका और अन्य कारणों से पीठ दर्द सामान्य परेशानी है। अगर कुछ उपायों को अपनाया जाए तो इस दर्द को बार-बार होने से रोका जा सकता है। आइए जानते हैं कि इस दर्द को रोकने के लिए कौन-कौन सी सावधानियां बरतें।

साइटिका से बचाव:

साइटिका से परेशान रहते हैं तो उठने बैठने का सही तरीका अपनाएं। खड़े होने, चलने और बैठने का सही तरीका अपनाएं।
एरोबिक एक्सरसाइज करें। ये एक्सरसाइज पेट और रीढ़ की हड्डी की मांसपेशियों में ताकत लाती है और उन्हें लचीला बनाती है।
कुछ भी भारी चीज उठाएं तो घुटनों को मोड़कर पीठ को सीधा रखें। ऐसा करने से, तनाव कूल्हे और पैरों पर आ जाता है।
कुर्सी पर बैठें तो पीठ को कुर्सी पर अच्छी तरह से टिकाकर रखें। बैठने के लिए ऐसी कुर्सी का इस्तेमाल करें जिसकी बैक स्पोर्ट करती हो।
कुर्सी पर कुशन का इस्तेमाल करें, आपकी पीठ के निचले भाग को सपोर्ट मिलेगी।
धूम्रपान न करें और वजन को कंट्रोल रखें वरना ये परेशानी बढ़ सकती है।

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